Wednesday, April 24, 2019

यूँ ही

जी


अब तो आदि हो चुके हैं, हम भी बंदर बाँट के,
कौन जाने बिल्लियां, किस मोड़ पे लड़ने लगें ।।

रवि शंकर सिंह
    ' मंथन '

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