Wednesday, June 23, 2021

फसे मजधर में जो हम

 मुक्तक


फसे मजधर में जो हम , किनारों ने हमें मारा ।।

कभी मरते बहारों से नजारों ने हमें मारा ।।

गए थे उनसे मिलने को हुई हालत हमारी ये,

कि उनके चार भाई थे ओ’ चारों ने हमें मारा ।।


रवि शंकर सिंह
     ‘मंथन’

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