Sunday, May 24, 2020

ग़ज़ल मेरी



गुनगुनाओगे जब ग़ज़ल मेरी ।।
राज़ खोलेगी सब ग़ज़ल मेरी ।।

मुख़्तसर तुम तो मुझसे कहते नहीं,
मुख़्तसर होगी अब ग़ज़ल मेरी ।।

तुझपे ता-उम्र ग़ज़ल लिखूंगा,
बन गई है तलब ग़ज़ल मेरी ।।

उम्र गुज़री वफ़ा निभाने में,
दिल टोलेगी अब ग़ज़ल मेरी ।।

इश्क तमन्ना वफ़ा तिजारत भी
हो गई है सब ग़ज़ल मेरी ।।

तेरी भी आँखों से बहेंगे आँसू,
तुझसे बोलेगी जब ग़ज़ल मेरी ।।

हैं सभी देखते मुझको बेबस,
मेरा खुदा है रब ग़ज़ल मेरी ।।

रवि शंकर सिंह
''मंथन'

Tuesday, May 19, 2020

ग़ज़ल ।। देखो ।।

ये तुमसे देखते न बनेगा मगर देखो ।।
क्या से क्या कर दिया तुमने आयकर देखो ।।

मेरे खाबों की हकीकत को झूठ समझने वालों,
कैसे छाती है यहाँ रात जाग कर देखो ।।

रास्ते स्याह हैं काटों से भरे हैं लेकिन,
न हो यकीन किसी एक पे चल कर देखो ।।

कितने बेताब दिल हैं यहां फिरे सड़कों पर,
हाँ! मेरी जान जरा घर से निकल कर देखो ।।

तोड़ने वालों ने तोड़ा तो बहुत है लेकिन,
कैसे बनता है पुर्जा पुर्जा ये शहर देखो ।।

एक नया ताज बनाऊंगा मैं तेरे खातिर,
आता न हो यकीन तो मरकर देखो ।।

सबको मिटाने का रास्ता जो तुमने खोजा है,
लगेगा बरसने कुदरत का फिर कहर देखो ।।


रवि शंकर सिंह
'मंथन'

Monday, May 11, 2020

लॉक डाउन की मशुशाला

लॉक डाउन की मधुशाला

अपनी बोतल आप गटकते कौन यहाँ है दिलवाला ।।
हो कटु भावों की अंगूरी पर एक पिला दो तुम प्याला ।।

एक प्रश्न का उत्तर दीजे अधिक नहीं कुछ भी कीजे,
जब जेबें हल्की होती हैं क्यों घटती जाती है हाला ।।

अगर कहीं बेहोश मिलूँ या पाओ केवल शव राही,
और कहीं न ले जाना, पहुंचा देना बस मधुशाला ।।

है रिक्त जीवनी अपनी जैसे खाली पैकर हाथों में,
हूँ सिर्फ उसी के इंतज़ार में कब आएगी मधुबाला ।।

कोई एक पिए कोई दो, कोई ताबड़ तोड़ पिए,
अब हर प्याले में ढूंढ रहा मैं अपने सा पीने वाला ।।

रवि शंकर सिंह
'मंथन'


नई पोस्ट

हिचकियाँ

शाख पर जब धूल गई, तो पत्तियाँ अच्छी लगी।। रात में जलती हुई सब, बत्तीयाँ अच्छी लगी।। जब  अचानक  रुक  गई,  ये  नाम  लेने  से तेरा  तबसे मुझको ...

सर्वाधिक खोजी गई पोस्ट