जोश


शस्त्र त्याग दे पीछे हट जा तुझमें लड़ने की बात नहीं ।।


मुझे हराकर जीते मुझसे , इतनी तेरी औकात नहीं ।। 


मंथन
 


No comments:

Post a Comment

नई पोस्ट

तेरा ख़्याल

दो घड़ी को ही तो आती है नींद बहलाने  उस पर तेरा ख्याल जगा देता है  हो गया है तुझसा ही ख़्याल तेरा भी  न बैठे है मेरे पास दग़ा देता है  ...

सर्वाधिक खोजी गई पोस्ट