Thursday, April 22, 2021

मैं उससे रूठ जाता हूं

 मुक्तक


मैं उससे रूठ जाता हूं वो मुझसे रूठ जाती है ।।

मैं उससे दूर जाता हूं वो बिलकुल टूट जाती है ।।

की पहले आप पहले आप में अक्सर ये होता है,

खड़े रहते हैं इसटेसन पे गाड़ी छूट जाती है ।।


रवि शंकर सिंह 

     ‘मंथन’

Wednesday, April 21, 2021

तू भी है और मैं भी हूं

 मुक्तक



नफ़रत का जिंदा एक पुलिंदा तू भी है और मैं भी हूं ।।


पिंजरे का कैदी एक परिंदा तू भी है और मैं भी हूं ।।


सूख गया हर फूल खिला जो एक गुलिस्तान ऐसा है,


जाने कैसे अब तक जिंदा तू भी है और मैं भी हूं ।।


रवि शंकर सिंह 

    ‘मंथन’



Tuesday, April 20, 2021

चिट्ठियां जो लिखी

 मुक्तक


चिठियाँ जो लिखी सब पड़ी रह गई ।।


बात दिल की थी दिल में गड़ी रह गई ।।


की लौट आएंगे वो बस इसी आस में 

इक ही स्टेशन पे गाड़ी खड़ी रह गई ।।



रवि शंकर सिंह
( मंथन )

Sunday, April 18, 2021

ये ख्वाबों में कब तक


मुक्तक




ये ख्वाबों में कब तक मुलाकात होगी ।।


हकीकत में बोलो ना कब बात होगी ।।


गए कितने दिन मुझको भीगी मिली थी,


बताओ ना फिर कब वो बरसात होगी ।।



रवि शंकर सिंह
     ‘मंथन’

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