स्याह रात की रोशनी
हर तरफ़ रोशनी है
लाल नीली पीली
और सफ़ेद भी
रोशनी स्याह रात की
एकदम स्याह रात
मगर रोशनी तो है
सूरज ना हो
न सही
रात है अंधेरा है
और घरों में रोशनी
दो घड़ी को ही तो आती है नींद बहलाने उस पर तेरा ख्याल जगा देता है हो गया है तुझसा ही ख़्याल तेरा भी न बैठे है मेरे पास दग़ा देता है ...