Wednesday, March 18, 2020

स्याह रात की रोशनी

स्याह रात की रोशनी


हर तरफ़ रोशनी है
लाल नीली पीली
और सफ़ेद भी
रोशनी स्याह रात की
एकदम स्याह रात
मगर रोशनी तो है
सूरज ना हो
न सही
रात है अंधेरा है
और घरों में रोशनी

रवि शंकर सिंह

     'मंथन'

Friday, March 6, 2020

चराग़

चराग़



बन के चराग़,

जिसके लिए,

वो,

जला रात भर,

होते ही भोर,

उसने वो,

दिया बुझा दिया ।।


रवि शंकर सिंह

   'मंथन'

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