हर किसी के दिल का, अलग दर्द है साहब
आईने बिखर गए, पत्थर सहेजने में ।।
मंथन
आईने बिखर गए, पत्थर सहेजने में ।।
मंथन
शाख पर जब धूल गई, तो पत्तियाँ अच्छी लगी।। रात में जलती हुई सब, बत्तीयाँ अच्छी लगी।। जब अचानक रुक गई, ये नाम लेने से तेरा तबसे मुझको ...