हर किसी के दिल का, अलग दर्द है साहब
आईने बिखर गए, पत्थर सहेजने में ।।
मंथन
आईने बिखर गए, पत्थर सहेजने में ।।
मंथन
दो घड़ी को ही तो आती है नींद बहलाने उस पर तेरा ख्याल जगा देता है हो गया है तुझसा ही ख़्याल तेरा भी न बैठे है मेरे पास दग़ा देता है ...