Sunday, August 8, 2021

सब समझता हूं

मुक्तक


सब समझता हूं तुम्हारी ये इशारेबाजियां ।।

जानलेवा हो रही हैं अब कमर की चाबियां ।।

जन्मभर के हैं जो सुधरे लाल मां के हैं सभी,

माँ के प्यारों को सदा से ही बिगाड़े भाभियां ।।


रवि शंकर सिंह
मंथन


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