मुक्तक
सब समझता हूं तुम्हारी ये इशारेबाजियां ।।
जानलेवा हो रही हैं अब कमर की चाबियां ।।
जन्मभर के हैं जो सुधरे लाल मां के हैं सभी,
माँ के प्यारों को सदा से ही बिगाड़े भाभियां ।।
दो घड़ी को ही तो आती है नींद बहलाने उस पर तेरा ख्याल जगा देता है हो गया है तुझसा ही ख़्याल तेरा भी न बैठे है मेरे पास दग़ा देता है ...
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