Saturday, June 21, 2025

हिचकियाँ

शाख पर जब धूल गई, तो पत्तियाँ अच्छी लगी।।
रात में जलती हुई सब, बत्तीयाँ अच्छी लगी।।

जब  अचानक  रुक  गई,  ये  नाम  लेने  से तेरा 
तबसे मुझको आ रही ये हिचकियाँ अच्छी लगी।।

रवि शंकर सिंह 

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