Tuesday, December 1, 2020

दिसम्बर में

दिसम्बर में



 सांसे भी लगती हैं नम, दिसम्बर में ।। 
कितने उभर आए गम, दिसम्बर में ।। 

 वो जो हमें जून में छोड़ गए थे,
 याद आए उनको हम, दिसम्बर में ।।

 वो बालों के बादल, आँखें नुरानी, 
सब के सब गए जम, दिसम्बर में ।।

 इसलिए भी मौसम ज़्यादा सर्द था,
 मिलने वो आए, कम, दिसम्बर में ।।

 'बेबस' मेरा दिल तोड़ कर जाने वाले,
 तू याद आएगा हरदम, दिसम्बर में ।।



 रवि शंकर सिंह 
'मंथन '

नई पोस्ट

हिचकियाँ

शाख पर जब धूल गई, तो पत्तियाँ अच्छी लगी।। रात में जलती हुई सब, बत्तीयाँ अच्छी लगी।। जब  अचानक  रुक  गई,  ये  नाम  लेने  से तेरा  तबसे मुझको ...

सर्वाधिक खोजी गई पोस्ट