मुक्तक
बलम बे - अलम, एक रोज़ कर देंगें बाबू ।।
कलम को कलम, एक रोज़ कर देंगे बाबू ।।
की सम्भाले हमें , या तू खुद को सम्भाले
धरम का धडम , एक रोज़ कर देंगे बाबू ।।
रवि शंकर सिंह
'मंथन'
बलम बे - अलम, एक रोज़ कर देंगें बाबू ।।
कलम को कलम, एक रोज़ कर देंगे बाबू ।।
की सम्भाले हमें , या तू खुद को सम्भाले
धरम का धडम , एक रोज़ कर देंगे बाबू ।।
रवि शंकर सिंह
'मंथन'