Saturday, March 9, 2019

धार्मिक राजनीत के नाम

मुक्तक

बलम बे - अलम, एक रोज़ कर देंगें बाबू ।।
कलम को कलम, एक रोज़ कर देंगे बाबू ।।
की सम्भाले हमें , या तू खुद को सम्भाले
धरम  का धडम , एक रोज़  कर देंगे बाबू ।।

रवि शंकर सिंह
'मंथन'

Monday, March 4, 2019

परिस्थितियों के नाम



मुझी को तू मेरा मुकद्दर समझ ले,
और किसको तू कातिल कहेगा यहाँ ।।

रवि शंकर सिंह

'मंथन'

Friday, March 1, 2019

चाहत

मेरी चाहत को अपनी तू बेशक बना ले
मेरी चाहत तो लेकिन मेरी रहेगी ।

रवि शंकर सिंह
'मंथन'

नई पोस्ट

हिचकियाँ

शाख पर जब धूल गई, तो पत्तियाँ अच्छी लगी।। रात में जलती हुई सब, बत्तीयाँ अच्छी लगी।। जब  अचानक  रुक  गई,  ये  नाम  लेने  से तेरा  तबसे मुझको ...

सर्वाधिक खोजी गई पोस्ट