Saturday, March 9, 2019

धार्मिक राजनीत के नाम

मुक्तक

बलम बे - अलम, एक रोज़ कर देंगें बाबू ।।
कलम को कलम, एक रोज़ कर देंगे बाबू ।।
की सम्भाले हमें , या तू खुद को सम्भाले
धरम  का धडम , एक रोज़  कर देंगे बाबू ।।

रवि शंकर सिंह
'मंथन'

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