Thursday, February 28, 2019

चाहत



मेरी चाहत की चाहत सभी को मगर 

मेरी चाहत किसी को तो चाहे नहीं ।।


रवि शंकर सिंह

'मंथन'

Thursday, February 14, 2019

मुक्तक

मुक्तक

बात आधी अधूरी रही रात भर ।।
एक छत में ही दूरी रही रात भर ।।
थोड़े नाराज़ वो थोडे नाराज़ हम ,
थोड़ी थोड़ी गुरूरी रही रात भर ।।


रवि शंकर सिंह

(  मंथन  )


Wednesday, February 13, 2019

मुक्तक

इन दिनों आजाद हैं अल्फ़ाज़ मेरे मुल्क के ।। 

हों भले हालात कुछ नासाज़ मेरे मुल्क के ।।

अब मेरे इस मुल्क पर रखना न तू टेढ़ी नज़र

सुन डुबा देंगें तुझे गमसाज़ मेरे मुल्क के ।।

रवि शंकर सिंह

'मंथन'

मुक्तक



उसका योवन छलका-छलका आता है आकाशों से ।।
की जैसे कोई राग छेड़ता जाता है आकाशों से ।।
स्वपन सुंदरी बनी वो मेरे, रहती दिल के पास सदा,
ह्रदय मेरा सन्देश प्राप्त अब करता है आकाशों से ।।

कविता के युवा स्वरों का स्वागत है

   कविता के युवा स्वरों का स्वागत  है !अपने समय के स्वरों को आइये कविता में कहे !



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