Wednesday, February 13, 2019

मुक्तक

इन दिनों आजाद हैं अल्फ़ाज़ मेरे मुल्क के ।। 

हों भले हालात कुछ नासाज़ मेरे मुल्क के ।।

अब मेरे इस मुल्क पर रखना न तू टेढ़ी नज़र

सुन डुबा देंगें तुझे गमसाज़ मेरे मुल्क के ।।

रवि शंकर सिंह

'मंथन'

No comments:

Post a Comment

नई पोस्ट

तेरा ख़्याल

दो घड़ी को ही तो आती है नींद बहलाने  उस पर तेरा ख्याल जगा देता है  हो गया है तुझसा ही ख़्याल तेरा भी  न बैठे है मेरे पास दग़ा देता है  ...

सर्वाधिक खोजी गई पोस्ट