उसका योवन छलका-छलका आता है आकाशों से ।।
की जैसे कोई राग छेड़ता जाता है आकाशों से ।।
स्वपन सुंदरी बनी वो मेरे, रहती दिल के पास सदा,
ह्रदय मेरा सन्देश प्राप्त अब करता है आकाशों से ।।
म
शाख पर जब धूल गई, तो पत्तियाँ अच्छी लगी।। रात में जलती हुई सब, बत्तीयाँ अच्छी लगी।। जब अचानक रुक गई, ये नाम लेने से तेरा तबसे मुझको ...
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