Friday, March 6, 2020

चराग़

चराग़



बन के चराग़,

जिसके लिए,

वो,

जला रात भर,

होते ही भोर,

उसने वो,

दिया बुझा दिया ।।


रवि शंकर सिंह

   'मंथन'

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