Tuesday, April 20, 2021

चिट्ठियां जो लिखी

 मुक्तक


चिठियाँ जो लिखी सब पड़ी रह गई ।।


बात दिल की थी दिल में गड़ी रह गई ।।


की लौट आएंगे वो बस इसी आस में 

इक ही स्टेशन पे गाड़ी खड़ी रह गई ।।



रवि शंकर सिंह
( मंथन )

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