Monday, May 11, 2020

लॉक डाउन की मशुशाला

लॉक डाउन की मधुशाला

अपनी बोतल आप गटकते कौन यहाँ है दिलवाला ।।
हो कटु भावों की अंगूरी पर एक पिला दो तुम प्याला ।।

एक प्रश्न का उत्तर दीजे अधिक नहीं कुछ भी कीजे,
जब जेबें हल्की होती हैं क्यों घटती जाती है हाला ।।

अगर कहीं बेहोश मिलूँ या पाओ केवल शव राही,
और कहीं न ले जाना, पहुंचा देना बस मधुशाला ।।

है रिक्त जीवनी अपनी जैसे खाली पैकर हाथों में,
हूँ सिर्फ उसी के इंतज़ार में कब आएगी मधुबाला ।।

कोई एक पिए कोई दो, कोई ताबड़ तोड़ पिए,
अब हर प्याले में ढूंढ रहा मैं अपने सा पीने वाला ।।

रवि शंकर सिंह
'मंथन'


No comments:

Post a Comment

नई पोस्ट

तेरा ख़्याल

दो घड़ी को ही तो आती है नींद बहलाने  उस पर तेरा ख्याल जगा देता है  हो गया है तुझसा ही ख़्याल तेरा भी  न बैठे है मेरे पास दग़ा देता है  ...

सर्वाधिक खोजी गई पोस्ट