लॉक डाउन की मधुशाला
अपनी बोतल आप गटकते कौन यहाँ है दिलवाला ।।
हो कटु भावों की अंगूरी पर एक पिला दो तुम प्याला ।।
एक प्रश्न का उत्तर दीजे अधिक नहीं कुछ भी कीजे,
जब जेबें हल्की होती हैं क्यों घटती जाती है हाला ।।
अगर कहीं बेहोश मिलूँ या पाओ केवल शव राही,
और कहीं न ले जाना, पहुंचा देना बस मधुशाला ।।
है रिक्त जीवनी अपनी जैसे खाली पैकर हाथों में,
हूँ सिर्फ उसी के इंतज़ार में कब आएगी मधुबाला ।।
कोई एक पिए कोई दो, कोई ताबड़ तोड़ पिए,
अब हर प्याले में ढूंढ रहा मैं अपने सा पीने वाला ।।
रवि शंकर सिंह
'मंथन'
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