कोरोना की कुंडली
बाबा हमरे कहत रहे वक्त बड़ा बलवान ।
फिरे जानवर मुक्त हैं पिंजरे में इंसान ।।
पिंजरे में इंसान समय की मार है ऐसी ।
बड़े बड़ों की कर दी इसने ऐसी तैसी ।।
कहे मंथन कविराय, बंद सब हैं मंदिर काबा ।
सबका करो प्रणाम सिखाईन हमारे बाबा।।
रवि शंकर सिंह
'मंथन'
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