डूबा सूरज
सूरज निकला था आज
पूरब से,
रोज ही निकलता है
पर आज कुछ तपिश कम थी
कम था ताप
चमक
उजाला
पर सूरज तो निकला था
यही गनीमत है
वरना एक रोज
डूब गया था
सूरज
भीतर ही भीतर
मेरे भीतर
रवि शंकर सिंह
' मंथन '
शाख पर जब धूल गई, तो पत्तियाँ अच्छी लगी।। रात में जलती हुई सब, बत्तीयाँ अच्छी लगी।। जब अचानक रुक गई, ये नाम लेने से तेरा तबसे मुझको ...
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