Wednesday, October 7, 2020

तुमसे भी खूबसूरत

 तुमसे भी खूबसूरत



मैं नहीं कहूंगा तुम्हारी


आंखें सागर जैसी हैं 


 की तुम्हारे गेसू 


काली घनी बदली जैसे हैं  


मैं नहीं कहूंगा 


तुम्हारे होंठ ,


गुलाब की पंखुड़ी से हैं 


या 


तुम्हारी गरदन सुराही जैसी


 मैं नहीं कहूंगा तुम्हारी


आवाज कोयल सी है


और ये तो बिल्कुल नहीं कहूंगा


 कि तुम्हारा जिस्म 


संगमरमर सा तरासा गया है 


क्योंकि तुम खूबसूरत हो 


ऐसी उपमाओं से परे 


किन्तु हां तुम खूबसूरत हो  


किसी और से नहीं ,


तुम,


तुमसे से भी खूबसूरत ।।




रवि शंकर सिंह

    ' मंथन '

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