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हिचकियाँ
शाख पर जब धूल गई, तो पत्तियाँ अच्छी लगी।। रात में जलती हुई सब, बत्तीयाँ अच्छी लगी।। जब अचानक रुक गई, ये नाम लेने से तेरा तबसे मुझको ...
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मुक्तक सब समझता हूं तुम्हारी ये इशारेबाजियां ।। जानलेवा हो रही हैं अब कमर की चाबियां ।। जन्मभर के हैं जो सुधरे लाल मां के हैं सभी, माँ के प्...
बढ़िया
ReplyDeleteग़ज़ब साहब
ReplyDeleteHahahaha 🤣 December me kya khub likha he December me
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