Subscribe to:
Post Comments (Atom)
नई पोस्ट
तेरा ख़्याल
दो घड़ी को ही तो आती है नींद बहलाने उस पर तेरा ख्याल जगा देता है हो गया है तुझसा ही ख़्याल तेरा भी न बैठे है मेरे पास दग़ा देता है ...
सर्वाधिक खोजी गई पोस्ट
-
शाख पर जब धूल गई, तो पत्तियाँ अच्छी लगी।। रात में जलती हुई सब, बत्तीयाँ अच्छी लगी।। जब अचानक रुक गई, ये नाम लेने से तेरा तबसे मुझको ...
-
मैंने अनवरत लड़े युद्ध रवि शंकर सिंह ‘मंथन’ अम्बर में कुंतल जाल एक मैंने देखा पात...
-
मुक्तक सब समझता हूं तुम्हारी ये इशारेबाजियां ।। जानलेवा हो रही हैं अब कमर की चाबियां ।। जन्मभर के हैं जो सुधरे लाल मां के हैं सभी, माँ के प्...
Bahut badhiya
ReplyDelete