Thursday, February 14, 2019

मुक्तक

मुक्तक

बात आधी अधूरी रही रात भर ।।
एक छत में ही दूरी रही रात भर ।।
थोड़े नाराज़ वो थोडे नाराज़ हम ,
थोड़ी थोड़ी गुरूरी रही रात भर ।।


रवि शंकर सिंह

(  मंथन  )


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