Thursday, September 5, 2019

गुरु चरणों में निवेदित




गुरु बिन जीवन हो रहा, ज्यों गंगा बिन हरिद्वार 


आसमान तो साफ़ पर, चहू ओर अंधियार ।।


चहू ओर अंधियार, गुरु की महिमा न्यारी


गुरु की महिमा गाएँ, जगत के सब नर नारी ।।


कहे मंथन कविराय, गुरु के बिना न दिन गिन


आलौकित संसार भला कब होए गुरु बिन ।।



रवि शंकर सिंह


(  मंथन  )

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