Sunday, September 29, 2019

कुंडली

                   कुंडली 


ताले को चाबी मिले, मिले हार को जीत
भले और कुछ ना मिले, मिले प्रीत को प्रीत ।।

मिले प्रीत को प्रीत, बात इतनी है दाता
जिसकी जेब भरी है, प्रीत वही कर पाता ।।

कहे मंथन कविराय, ज़ुबाँ पे आए छाले
बिन चाबी के जब भी, हमने खोले ताले ।।

रवि शंकर सिंह

     'मंथन'

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