कुंडली
बापू बापू कह रहे, बापू के सब लाल ,
घर में पूछत ना बना, बापू से क्या हाल ।।
बापू से क्या हाल, पूछ गर लेता कोई ,
पूत तेरे में जग जाती फिर ममता सोई ।।
कहे मंथन कविराय, सांच अब काको झाँपू
रोज़ सड़क पे बैठे मिलते कितने बापू ।।
रवि शंकर सिंह
( मंथन )
घर में पूछत ना बना, बापू से क्या हाल ।।
बापू से क्या हाल, पूछ गर लेता कोई ,
पूत तेरे में जग जाती फिर ममता सोई ।।
कहे मंथन कविराय, सांच अब काको झाँपू
रोज़ सड़क पे बैठे मिलते कितने बापू ।।
( मंथन )
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