Thursday, October 3, 2019

तुम रचनाकार हो

          तुम रचनाकार हो


क्योंकि तुम रचनाकार हो

ये दायित्व है तुम्हारा

सर्जन करो

फिर दोबारा

सर्जन जिसमें 

कोई किसी का शोषक न हो

कोई किसी का भक्षक न हो

जहाँ किसान आत्महत्या न करें

जहाँ माँ को अपना बच्चा न बेचना पड़े

सर्जन करो कर सको तो

या छोड़ दो दावे

की तुम रचनाकार हो।।


 रवि शंकर सिंह

     'मंथन'   

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