Monday, October 28, 2019

आई भी थी

आई भी थी


भीड़ की भीड़ थी, तन्हाई भी थी ।।

झूठ आँखों में था, सच्चाई भी थी ।।


ख्यालों में गुज़ारी रात थी लेकिन,

उनके ख्यालों में नींद आई भी थी ।।


मैं अकेला रह न जाऊँ, बाद तेरे

याद तेरी इस लिए आई भी थी ।।


आपने चाहा मुझे, और चाहा भी नहीं

दिल में, आपके आजमशाही भी थी ।।


छोड़ कर हमको, वो गए जाने किधर,

जिनकी बातों में बेबस रोशनाई भी थी ।।


रवि शंकर सिंह

'मंथन'

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