Friday, October 11, 2019

हो गया है

       ग़ज़ल


इश्क जब से सूफ़ियाना हो गया है ।।
ख़ाबों में उनका आशियाना हो गया है ।।

जब से सड़क पर जाम खुब दिखने लगा,
दिल में उनका आना जाना हो गया है ।।

हमें भी तो ज़रूरत है नए अपडेट की,
इश्क तुमसे कितना पुराना हो गया है ।।

आप आए झुण्ड में हमको खुशी बेहद हुई
आज का दिन कैसा खजाना हो गया है ।।

तोड़ कर दिल को मेरे जबसे गए हैं लोग वो,
ये मेरे खुदा का एक ठिकाना हो गया है ।।


रवि शंकर सिंह
     'मंथन'

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