Friday, November 15, 2019

चार पंक्तियां

जाने कब क्या हो जाए, जलने और जलाने में ।।

क्या क्या छूट गया है पीछे, मिलने और मिलाने में ।।


आज मिले हो जब लिपटे हैं, अपने अंत जनाजे पर,

देर लगा दी तुमने कितनी, एक बार बस आने में ।।


रवि शंकर सिंह

     'मंथन'


#हिंदी कविता

7 comments:

  1. वाह, बेहतरीन
    👏👏

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  2. अदभुत, मज़ा आ गया।

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  3. बेटा।अभी से उदास कविता क्यों?
    जीवन असभुत प्रसाद है।इसे पूरे उत्साह के साथ जीना सीखो।
    कोई भी व्यक्ति जीवन में अंतिम नहीं जिसके लिए जीवन की सकारात्मक ऊर्जा से वंचित रहा जाये।

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    Replies
    1. आपके ध्यानाकर्षण के लिए धन्यवाद मैंम और जहाँ तक बात है उदासी तो बेहतरीन लम्हां सा लगती है मैंम जिसमें कविताएं जल्दी बाहर आती हैं।

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