तुमने हमको नहीं बुलाया हद कर दी ।।
बे-मतलब ही हमें थकाया हद कर दी ।।
महफ़िल एक सजाई अपने घर आँगन,
हमको सारी रात जगाया हद कर दी ।।
देख रहे थे खाब रखा सिर तेरे कंधे,
बे-मतलब ही हमें जगाया हद कर दी ।।
वेदों को बकवास पुराणों को मिथ्या,
और हमको हनुमान बताया, हद कर दी ।।
थे सारे घटिया शायर महफ़िल में तेरी,
सबको बढियाँ ठहराया, हद कर दी ।।
बिना आईना देखे तुमने काम किया,
हमको घटिया बतलाया, हद कर दी ।।
था जिन्हें समझ में न आता भूंगोल,
उनको तुमने इतिहास सुनाया हद कर दी ।।
अपने दिल की बात छुपा कर दिल में,
तुमने हमको खूब सताया हद कर दी ।।
हर सितम तुम्हारा सिर माथे पर लेते थे,
अपनी शादी में हमें बुलाया, हद कर दी ।।
रवि शंकर सिंह
'मंथन'
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