मुक्तक
आबाद अगर न हो पाओ, तो मेरी याद भुला देना ।।
याद बहुत तो आऊँगा, लेकिन हर बात भुला देना ।।
जो आगे बढ़ने से रोकें, और बने बेड़ियाँ पैरों की,
है तुम्हें इजाजत मेरी जाँ , ऐसे जज़्बात भुला देना ।।
शाख पर जब धूल गई, तो पत्तियाँ अच्छी लगी।। रात में जलती हुई सब, बत्तीयाँ अच्छी लगी।। जब अचानक रुक गई, ये नाम लेने से तेरा तबसे मुझको ...
Very nice
ReplyDeleteधन्यवाद
DeleteVery beautiful lines !
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