Thursday, September 10, 2020

मुक्तक

 

मुक्तक

आबाद अगर न हो पाओ, तो मेरी याद भुला देना ।।

याद बहुत तो आऊँगा, लेकिन हर बात भुला देना ।।


जो आगे बढ़ने से रोकें, और बने बेड़ियाँ पैरों की,

है तुम्हें इजाजत मेरी जाँ , ऐसे जज़्बात भुला देना ।।


रवि शंकर सिंह

' मंथन '

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