मुक्तक
आबाद अगर न हो पाओ, तो मेरी याद भुला देना ।।
याद बहुत तो आऊँगा, लेकिन हर बात भुला देना ।।
जो आगे बढ़ने से रोकें, और बने बेड़ियाँ पैरों की,
है तुम्हें इजाजत मेरी जाँ , ऐसे जज़्बात भुला देना ।।
दो घड़ी को ही तो आती है नींद बहलाने उस पर तेरा ख्याल जगा देता है हो गया है तुझसा ही ख़्याल तेरा भी न बैठे है मेरे पास दग़ा देता है ...
Very nice
ReplyDeleteधन्यवाद
DeleteVery beautiful lines !
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