Sunday, November 24, 2019

अच्छा है

ग़ज़ल



जो गुज़रना है गुज़र जाए तो अच्छा है ।।
वो मुझको न नज़र आए तो अच्छा है ।।

वो जो कहते हैं आप, आप ही कि तरह हैं
इधर भी उनकी नज़र आए तो अच्छा है ।।

एक अरसे से नहीं दिखे बादल शहर में,
जो तेरी ज़ुल्फ़ बिखर जाए तो अच्छा है ।।

तेरी आरज़ू जीने का सलीका है अलग ,
ये सलीका हमें भी अगर आए तो अच्छा है ।।

हमें भी आ जाए इश्क मिजाजी का शऊर,
घाव कुछ और निखर आए तो अच्छा है ।।

रवि शंकर सिंह
'मंथन'

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