Monday, June 29, 2020

चीन की कुंडली

चीन की कुंडली

चीनी की तरहा नहीं, है चीनी सरकार ।।
बात बात पर चाहती, बेढंगी तकरार ।।
बेढंगी तकरार, और क्या कर सकती है ।।
हमको रही डराय, आप भी डर सकती है ।।
कहे मंथन कविराय, आ रही खुशबू भीनी ।।
सुगर फ्री अपनाओ, छोड़ दो बिलकुल चीनी ।।


सुनो की बिल्कुल दोगली, है चीनी सरकार
भाई भाई बोल कर, करे पीठ पर वार ।।
करे पीठ पर वार, है इनकी सोंच दोगली
ताकत रहे दिखाए, इनकी शाख खोखली ।।
कहे मंथन कविराय, हो जो ऐसा पड़ोसी
सीधे कर दो वार, न इनकी बात सुनो की ।।


माओ घाओ हो गया, नहीं बदलता चीन 
सांपों के दो मुह मिलें, इनके मुह हैं तीन ।।
इनके मुह हैं तीन, भरोसा इनका कीजे
यानी इनके मुह में अपनी गरदन दीजे ।।
कहे मंथन कविराय, काटकर शीश चढ़ाओ
अगर सामने मिले, भटकता कोई माओ ।।


रवि शंकर सिंह
     'मंथन'

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