Wednesday, September 25, 2019
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हिचकियाँ
शाख पर जब धूल गई, तो पत्तियाँ अच्छी लगी।। रात में जलती हुई सब, बत्तीयाँ अच्छी लगी।। जब अचानक रुक गई, ये नाम लेने से तेरा तबसे मुझको ...
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मुक्तक सब समझता हूं तुम्हारी ये इशारेबाजियां ।। जानलेवा हो रही हैं अब कमर की चाबियां ।। जन्मभर के हैं जो सुधरे लाल मां के हैं सभी, माँ के प्...
!!!!!????
ReplyDeleteकभी कभी कुछ और सिम्बल का भी इस्तेमाल कर लिया कर आंकित?
Deleteलाज़वाब शेर ❤️
ReplyDeleteधन्यवाद गुरु
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