Tuesday, October 29, 2019

गीत :- एक बार कहो तुम आओगे

एक बार कहो तुम आओग


आतप अंधड़ चाहे वन हो
चाहे निराश बिल्कुल मन हो ।।
हो नहीं मिलन की आस अगर
कोई भी न हो पास मगर ।। 

तुम राहों से लौट न जाओगे
एक बार कहो तुम आओगे ।।1।।

जब सावन में बादल छाएँ न
फागुन में कलियाँ आएं न ।
जब चांद न छत पर आया हो
न सूरज धूप नहाया हो ।

तुम खुद की राह बनाओगे
एक बार कहो तुम आओगे ।।2।।

जब चांद सितारे न निकलें
कहीं कूल किनारे न निकलें ।।
जब सारी राहें बन्द मिलें 
हर जगह छन्द पे छन्द मिलें ।।

तुम कहीं नहीं घबराओगे
एक बार कहो तुम आओगे ।।3।।

जीवन में केवल आग हो बस 
दामन में छीटें दाग हों बस ।।
जब सबके हम ही निशाने हों
हर कदम कदम पर तानें हों ।।

तुम कहो लौट न जाओगे
एक बार कहो तुम आओगे ।।4।।

हों सभी स्वर्ग की सुंदरियाँ
मैं लगूँ सामने कंकरियाँ ।।
जब चांद ज़मी पर आता हो
संग चाँदनियाँ भी लाता हो ।।

तुम कहो छोड़ न जाओगे
एक बार कहो तुम आओगे ।।5।।

ये प्रेम गली बेज़ार नहीं
है प्रेम किया व्यापार नहीं ।।
क्या पाना है क्या खोना है
अपनों को अपना होना है।।

तुम भले लौट न पाओगे
एक बार कहो तुम आओगे ।।6।।

है मंजिल तुमसे दूर बहुत
होते हो तुम मजबूर बहुत ।।
बोल न कुछ भी बोल सको
या राहों में राह न डोल सको ।।

बस दूर खड़े मुस्काओगे ।।
एक बार कहो तुम आओगे ।।7।।

रवि शंकर सिंह
मंथन 

10 comments:

  1. जीवन में केवल आग हो बस
    दामन में छीटें दाग हों बस ।।
    जब सबके हम ही निशाने हों
    हर कदम कदम पर तानें हों ।।

    तुम कहो लौट न जाओगे
    एक बार कहो तुम आओगे ।।

    🙏🙏🙏🙏👌👌👌👌

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  2. Bahut hi zyada khubsurat likha h ravi apne

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    1. यदि सच में अच्छा हर तो शेयर भी कीजिए

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  3. Replies
    1. ये क्वेश्चन मार्क किस लिए है भाई।

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  4. वाआआह खूबसूरत

    ReplyDelete

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